-
कुल्लू दशहरा में हर देवता को नहीं मिलेगा आधिकारिक निमंत्रण और सरकारी दर्जा, हाईकोर्ट का फैसला
-
बिना दर्ज ऐतिहासिक महत्व और नए घरेलू देवताओं को सुविधाएं देने की याचिका खारिज
-
वाजिब-उल-अर्ज और कारदार संघ की सिफारिशों को माना आधार, डीसी कुल्लू का आदेश सही ठहराया
शिमला। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं को आधिकारिक निमंत्रण भेजने और मैदान में बैठने का स्थान, तंबू, तिरपाल व चटाई जैसी सुविधाएं देने से जुड़े मामले पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन देवताओं का कोई दर्ज ऐतिहासिक महत्व नहीं है और जो प्राचीन परंपरा का हिस्सा नहीं रहे हैं, उन्हें दशहरा समिति द्वारा आमंत्रित पारंपरिक देवताओं के समान दर्जा या सरकारी सुविधाएं नहीं दी जा सकतीं।
न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने देव बंशीरा महाराज सिधवां की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए उपायुक्त कुल्लू के 10 जनवरी 2025 के आदेश को पूरी तरह सही ठहराया है। प्रशासन ने इस आदेश के तहत याचिकाकर्ता को मैदान में बैठने के लिए स्थान देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कुल्लू दशहरा में किस देवता को आमंत्रित किया जाए, इसकी सिफारिश का अधिकार कुल्लू जिला देवता कारदार संघ के पास निहित है। कारदार संघ ने 10 अक्तूबर 2011 को ही प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया था कि जगह, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सीमाओं के चलते नए बने व्यक्तिगत या घरेलू देवताओं को आमंत्रित न किया जाए।
अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि राजस्व बंदोबस्त के दौरान तैयार होने वाला वाजिब-उल-अर्ज एक बेहद अहम दस्तावेज है, जो देवताओं के इतिहास, परंपरा और अनुष्ठानों को प्रमाणित करता है। कोठी मंगलोर के वाजिब-उल-अर्ज में याचिकाकर्ता देवता का कोई उल्लेख नहीं पाया गया।
एसडीएम बंजार की रिपोर्ट और उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता देवता वर्ष 1990 में मूल देव बंशीरा से अलग होकर समर्थकों के एक छोटे समूह द्वारा स्थापित किया गया घरेलू देवता है। मूल देव बंशीरा का रथ वर्ष 2007 से उत्सव में भाग ले रहा है, जबकि याचिकाकर्ता का रथ बाद में तैयार किया गया। सीमित अनुयायियों वाले ऐसे देवताओं को प्रशासन सीधे तौर पर आमंत्रित नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता चाहे तो अपनी ऐतिहासिक प्रामाणिकता साबित करने के लिए अन्य विधिक मंचों पर जा सकता है।



